त्रिपुरा में वामपंथ का किला ध्वस्त करने की खुशी के खुमार में भाजपा कुछ ऐसी डूबी कि उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा की अपनी सीटें ही गंवा बैठी। बुआ और भतीजे (मायावती और अखिलेश यादव) ने हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से रिक्त हुई गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट पर भाजपा को चारों खाने चित कर दिया। बसपा ने दोनों सीटों पर सपा प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। उप्र में 1993 में सपा-बसपा ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और सरकार बनाई थी। 25 साल बाद 2018 में दोनों दल एकजुट हुए हैं, हालांकि अभी औपचारिक गठबंधन नहीं हुआ है। अब लोकसभा में भाजपा की 272 और समाजवादी पार्टी की सात सीटें हो गईं हैं। गोरखपुर संसदीय सीट पर 1991 से लगातार भाजपा की जीत के रिकॉर्ड को सपा ने ध्वस्त कर दिया। योगी के मुख्यमंत्री बनने के करीब एक वर्ष बाद उनकी ही छोड़ी सीट पर आए चुनाव परिणाम ने तस्वीर बदलकर रख दी। देखिए इस उपचुनाव के बाद से कितनी बदल सकती है यूपी की तस्वीर।