दुनियाभर में स्वास्थ्य टेक्नोलॉजी को लेकर बड़ी तरक्की हुई है, लेकिन भारत अब भी बीमारियों का बोझ ढो रहा है। यही नहीं इन बीमारियों का सही-सही और किफायती इलाज मिलना आज भी भारतीयों के लिए सपने जैसा ही है। अस्पतालों और डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में बेड की कमी भी बड़ी समस्या है। यही नहीं, इंश्योरेंस के प्रति जानकारी का आभाव या उदासीनता भी भारत में बड़े पैमान पर फैली हुई है। 2014-15 में 302425 करोड़ रुपये भारतीयों ने अपनी जेब से स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए और यह स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले कुल खर्च का 62.6 फीसद यानी जीडीपी का 2.43 फीसद था। 2014-15 में ही 139949 करोड़ रुपये सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए। यह देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का कुल 29 फीसद और जीडीपी का 1.1 फीसद था। भारत की जनसंख्या सवा अरब के करीब है और साल 2017 तक यहां सिर्फ 43.7 करोड़ लोगों के पास ही इंश्योरेंस की सुविधा है। यही नहीं इनमें से भी 33 करोड़ लोग तो सरकारी इंश्योरेंस स्कीमों के भरोसे हैं, जिनका कवरेज भी अच्छा नहीं होता।