New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने में दाखिल याचिका पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला की कथित 'हिरासत' को लेकर  केंद्र सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है. राज्यसभा सांसद वाइको की याचिका पर CJI रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने सुनवाई की. एमडीएमके के नेता वाइको की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या अब्दुल्ला किसी प्रकार की हिरासत में हैं  इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में रखा गया है. मेहता ने कहा अब्दुल्ला को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में रखा गया है..इस एक्ट के तहत दो साल तक बिना किसी सुनवाई के हिरासत में रखा जाता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फारुक अब्दुल्ला को रिहा करने की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए एक हफ्ते मे जबाब मांगा है. वहीं केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया और कहा कि नोटिस की जरूरत नहीं है. इस मामले पर 30 सितंबर को अगली सुनवाई होगी.

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत दे दी है, इस दौरान वह चार जिलों का दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वह कोई राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. वहां जाने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट को एक रिपोर्ट सौपेंगे.कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आज़ाद की याचिका पर सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत दे दी है सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बाद अब गुलाम नबी आजाद बारामूला, अनंतनाग, श्रीनगर और जम्मू जिलों का दौरा कर सकते हैं. गुलाम नबी आजाद की तरफ से अदालत को भरोसा दिलाया गया है कि इस दौरान वह कोई रैली नहीं करेंगे. उधर सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत दिए जाने को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा....जो एक इंसान  राज्य का मुख्यमंत्री रहा हो.वहां का मूल निवासी हो अगर उसे अपने घर जाने के लिए कोर्ट जाना पड़े तो ये बड़े दुख की बात है