Shivpuri(MP): शिवपुरी से करीब सौ किमी की दूरी पर राजस्थान की सीमा पर बसा है मुड़ेनी गांव। इस गांव में मुख्य आबादी सहरिया आदिवासियों की है। यहाँ आदिवासी समुदाय को लाभ पहुंचाने वाली जो भी जनकल्याणकारी योजनाएं हैं,वे न तो पहुंच रही हैं और जो पहुंच भी रही हैं तो उन पर ठीक से अमल नहीं हो रहा है। लिहाजा गरीब व लाचार आदिवासियों को पैसे के लिए अपने बच्चों को  गिरवी रखने को मजबूर होना पड़ रहा है।

ये बच्चे गिरवी राजस्थान से मध्यप्रदेश की सीमा पर भेड़ व ऊंट चराने आये रेबड़ियों के रुप में रखे जाते हैं। बच्चों को मजदूर के रूप में रखा जाता है। शर्त ये होती है कि ये बीच में काम छोड़ कर नहीं आ सकते हैं। 4 से 6 माह तक ये बच्चे जंगल में ही रहकर ही भेड़ व ऊँटों को चराने के साथ उनकी रखवाली भी करते हैं।इस दौरान इन्हें भोजन पानी देने की जिम्मेवारी यही रेबड़ियां ही उठाते हैं।

आदिवासी महिला स्पष्ट रूप से मंजूर करती है कि हाँ, चार माह के लिए बच्चे भेड़ चराने वालों को मजबूरी में रखकर रूप में गिरवी रखकर गुज़ारा करते हैं। इस मामले में जब जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से बात की तो उन्होंने टालमटोल का रवैया अपनाते हुए कहा कि मुझे आपने जानकारी दी है पता करूँगा।यदि आपके पास कोई व्यक्तिगत नाम है तो बताइए। हालांकि भरण पोषण के लिए मनरेगा जैसी योजना चल रही है।विशेष परिस्थिति में स्वरोजगार योजना में भी लाभ दिया जा सकता है। दूसरी तरफ महिला बाल विकास की परियोजना अधिकारी का कहना है कि हमने आदिवासियों के कथन लिए हैं ,ऐसा कुछ नहीं है।