दंतेवाड़ा(छत्तीसगढ़): बस्तर में नक्सलवाद पर नकेल कसने के लिए पुलिस‍ ने चारों ओर से घेराबंदी कर दी है। नक्सपलियों से निपटने के लिए नई रणनीति बनाई जा रही है। जिसमें वह गोली के साथ बोली को हथियार बना रहे हैं। बोली यानि उनकी ही भाषा सीख रहे हैं। इस भाषा को सीखकर वह नक्सल किले को ध्वस्त करने की तैयारी कर रहे हैं।  जवानों को गोंडी भाषा की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि आपरेशन के दौरान जवान सीधे ग्रामीणों से जुड़े और उनकी परेशानी उनकी भाषा समझ लें । इसके लिए पुलिस लाइन में डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड के जवानों को गोंडी बोलने समझने और लिखने- पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खास यह है कि इस क्लास में पुलिस कप्तान भी शामिल हो रहे हैं। एसपी का दावा है कि स्थानीय बोली भाषा बोलने- समझने के बाद जवान नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगें। 

नक्सोलियों से निपटने के लिए गोंडी भाषा के चयनित 30 हजार शब्द और वाक्यों की डिक्शनरी भी तैयार की जा रही है। जिसमें गोंडी शब्दों का हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ और अनुवाद होगा। पुलिस लाइन कारली में जवान नियमित अभ्यास के साथ एक विशेष कक्षा में शामिल हो रहे हैं। जहां जवान गोंडी बोली भाषा का ज्ञान ले रहे हैं। जवानों को गोंडी के शब्द के साथ वाक्य बनाना, बोलना, लिखना समझाया जा रहा है। इसके बाद उनका टेस्ट। भी हो रहा है। 
इस क्लास में बेहतर प्रदर्शन करने पर जवानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डिक्शनरी और क्लास में बतौर ट्यूटर की भूमिका अदा करने वाले जवानों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत और सम्मानित भी किया जाएगा। कोर्स पूरा होने पर उन्हें सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। कुल मिलाकर यह नक्सटलियों से निपटने और लोगों से जुड़ने की नायाब पहल है।