सुप्रीम कोर्ट का फैसला बागी विधायकों के लिए एक वरदान की तरह है, क्योंकि अब उन पर पार्टी व्हिप लागू नहीं होगा. ये महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि डिस्क्वालिफिकेशन की स्थिति में अगर कुमारस्वामी सरकार गिर जाती और बीजेपी सरकार बनाती तो वे मंत्री नहीं बन पाते और मंत्री बनने के लिए उन्हें दोबारा चुनाव जीतना पड़ता। लेकिन अब उनका इस्तीफा विधानसभा स्पीकर स्वीकार कर लेते हैं, तो वे मंत्री बन सकते हैं, लेकिन उन्हें 6 महीने के भीतर दोबारा चुनकर आना होगा.  अब सवाल ये है कि कर्नाटक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पश्चिम बंगाल, गोवा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्या असर होगा?