नागपुर के आरएसएस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश की संस्कृति और उसकी पहचान की विशेषता का उल्लेख करते हुए कई बातें कही। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। उन्होंने कहा कि देश के लिए समर्पण ही देशभक्ति है। मुखर्जी ने कहा कि भारत खुला हुआ देश रहा है। भारत के दरवाजे पहले से खुले हुए हैं। 

इससे पहले, वे गुरूवार को आरएसएस संस्थापक हेडगेवार के जन्मस्थली गए और उनकी तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर मुखर्जी ने वीजिटर्स बुक में हेडगेवार को महान सपूत बताते हुए लिखा- मैं यहां पर भारत के महान सपूत को नमन करने आया हूं। उनके इस दौरे और उनके वहां दिए जानेवाले भाषण पर देशभर की खास नज़र बनी हुई है।

मुखर्जी ने कहा- आज गुस्सा बढ़ रहा है। हर दिन हिंसा की ख़बर आ रही है। हिंसा, गुस्सा छोड़कर हम सब शांति के रास्ते पर चलें। प्रणब मुखर्जी ने कहा- विविधता और टॉलरेंस में ही भारत बसता है। सिर्फ एक धर्म एक भाषा भारत की पहचान नहीं। पचास सालों में यही मैने सीखा है। भेदभाव और नफरत करेंगे तो हमारी पहचान को ख़तरा होगा। अलग भाषा,धर्म और रंग भारत की पहचान है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा- विविधता में एकता भारत को ख़ास बनाता है। मैं राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। हमारी राष्ट्रीय पहचान विविधता में एकता से है। भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटम्बकम से प्रभावित है। वही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा की - संघ सबको जोड़नेवाला संगठन है। सबकी माता भारत माता है। सबके जीवन पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव है। भारत में जन्मा हर व्यक्ति भारत पुत्र है। प्रणब मुखर्जी के आने पर विवाद ठीक नहीं है। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रणब मुखर्जी का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह वार्षिक कार्यक्रम है और इसको लेकर विवाद निर्थक है।