बस्तर ब्लॉक के बालेंगा पंचायत की आदिवासी महिलाएं सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। उनके लिए वो दौर खत्म हो चुका है, जब कौड़ी-कौड़ी को मोहताज होना पड़ता था। सच्ची लगन और कठिन परिश्रम की बदौलत उन्होंने आज बालेंगा को कुटीर उद्योग का हब बना दिया है। विभिन्न् समूहों से जुड़ीं यहां की हजार से अधिक महिलाएं साबुन, सर्फ, सेनेटरी नेपकिन, दोना-पत्तल और काजू प्रसंस्करण केंद्र का संचालन कर हर माह हजारों रुपया कमा रही हैं। इतना ही नहीं, सैकड़ों महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। स्कूल का मुंह तक नहीं देख पाने वाली ये महिलाएं आज बच्चों को स्कूल भेजने के साथ ही उनकी बेहतर परवरिश भी कर रही हैं। इस तरह गांव में अर्थव्यवस्था की कमान महिलाओं ने सम्हाली और अपने गांव को कुटिर उद्योग के हब के रूप में पहचान दिला दी है। बना रहे साबुन-नेपकिन, चला रहे काजू प्रसंस्करण केंद्र बालेंगा में शकुंलता निषाद के नेतृत्व में महिला समूह साबुन बनाने का काम कर रहा है। समूह की नेहा, संगीता, रेवती और निर्मला आदि ने बताया कि वे एक साल से साबुन बना रही हैं। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने बताया कि तैयार साबुन को वे ग्रामीण क्षेत्र की किराना दुकानों में बेचती हैं। इससे समूह की सभी महिला हर माह ठीक-ठाक कमाई कर लेती है।