केंद्रीय राजनीति में पी. चिदंबरम ने अपनी धाक जमाई 1997 के बजट से, देवेगौड़ा यूनाइटेड फ्रंट की सरकार का नेतृत्व कर रहे थे. चिदंबरम ने गठबंधन वाली सरकार की कमजोर स्थिति की परवाह न करते हुए बड़े सुधारों को लागू किया और 1997 के बजट में पर्सनल और कॉरपोरेट टैक्स रेट में बड़ी कटौती की. मजेदार बात ये है कि तब तक कांग्रेस में चिदंबरम की वापसी हो चुकी थी. चिदंबरम की उड़ान 2004 में बुलंदियों पर पहुंची, जब मनमोहन सिंह की सरकार में चिदंबरम वित्तमंत्री बने. वित्तमंत्री के तौर पर चिदंबरम को लेफ्ट के साथ डील करनी थी, क्योंकि उस समय मनमोहन सिंह की सरकार को लेफ्ट का भी बाहरी समर्थन था लेकिन अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार को गति देने के लिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देने वाले चिदंबरम के कई प्रस्तावों का वामपंथी दलों ने खुलकर विरोध किया. देखिए चिदंबरम की पूरी कहानी -