Raipur(Chhattisgarh):  वह जन्म से दिव्यांग हैं। उसके दोनों हाथ नहीं हैं, बोल और सुन भी नहीं सकते, लेकिन उसमें इस जन्म- जात दिव्यांगता से लड़ने, आजादी पाने का जज्बा है। हम बात कर रहे हैं भिलाई के रहने वाले गौकरण पाटिल की, जो पैरों से पेटिंग करते हैं और पैरों की ही उंगलियों से कम्प्यूटर पर टाइपिंग भी। आज समाज के लिए मिसाल बने गौकरण दिव्यांग बच्चों को फाइन आर्ट सिखा रहे हैं, वह भी पैरों के इसारे पर।

रायपुर का कोपलवाणी एक दिव्यांग बच्चों का स्कूल है। जहां तकरीबन 150 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। गौकरण तीन माह से यहां के बच्चों को फाइन आर्ट सिखा रहे हैं। पैरों से साइन लैंग्वेज में बच्चों से बात करते हैं। गौकरण साइन लैंग्वेज में बताते हैं कि बचपन से लेकर अब तक केवल संघर्ष किया।

स्कूल की डायरेक्टर सीमा छाबरा कहती हैं कि स्कूल में तीन और ऐसे ही शिक्षक हैं जो दिव्यांग हैं। सभी बच्चों को साइन भाषा से शिक्षा देते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तालाश में भटकते हुए शहर पहुंचे। किसी तरह एक दुकान में जॉब मिला, जहां कम्प्यूटर का कार्य करना था। साल भर काम करने के बावजूद दिव्यांगता के कारण मेहनताना नहीं मिला। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इस तरह के कई अनुभव मिल चुके हैं। वे कहते हैं कि कई जगहों पर लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। वक्त जरूर बदलता है। शायद यही वजह है कि लोग अब मुझे मेरी पेंटिंग से जानते हैं। इतना ही नहीं कई लोग मुझसे पेंटिंग सिखना चाहते हैं। कभी-कभी खुद पर गर्व होता है।