ऐसे तो आमतौर पर रसोई या खान-पान का सियासत से कोई सीधा वास्ता नहीं है, लेकिन इधर कुछ सालों से कोई न कोई डिश या जायका मीडिया की सुर्खियां बटोरता रहा है। 2014 के आम चुनाव के आसपास मोदी की चाय सुर्खियों का सरताज बनी तो इधर कुछ महीने पहले गरमा-गरम पकौड़े चर्चा में आए। लेकिन ठंडे पड़ चुके पकौड़े की जगह अब गरमा-गरम छोले भटूरे ने देश का राजनीति में एंट्री मार ली है। 

इन दिनों गरमा गरम छोले भटूरे  की चर्चा इसलिए तेज है, क्योंकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस जायकेदार डिश को  बहुप्रचारित उपवास से ऐन पहले खा लिया और इसके बाद महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर उपवास के लिए पहुंच गए। यह अलग है कि कभी गांधी के उपवास से ब्रितानी हुकूमत हिल जाती थी, जबकि राजघाट पर सोमवार को कांग्रेस का उपवास उपहास बन गया।