Delhi: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर सद्भावपूर्ण माहौल में बातचीत की वकालत की है। एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा उठाए जाने पर भागवत फिर से विपक्ष के निशाने पर हैं। कांग्रेस और बीएसपी ने उन पर तीखा हमला बोला है।

भागवत ने रविवार को कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं उन लोगों के बीच इस पर सद्भावपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए। उधर, इस बयान को लेकर विपक्ष ने आरएसएस के साथ बीजेपी पर भी तीखा हमला बोला है। एक तरफ जहां कांग्रेस ने इसे दलितों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म करने का अजेंडा बताया, वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि आरक्षण मानवतावादी संवैधानिक व्यवस्था है जिससे छेड़छाड़ अनुचित और अन्याय है। मायावती ने दो टूक में जबाब देते हुए कहा कि आरएसएस को अपनी आरक्षण विरोधी मानसिकता त्याग देनी चाहिए।

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के बहराइच से कांग्रेस नेता सावित्रीवाईफुले ने भी आरक्षण के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार और मोहन भागवत पर ताजा हमला बोला है उन्होंने कहा बीजेपी मनुवादी सोच देश पर थोपना चाहती है..और अगर ऐसा हुआ तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। 
 
भागवत ने एक कार्यक्रम में आरक्षण के इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस पर बात की थी लेकिन इससे काफी हंगामा मचा और पूरी चर्चा वास्तविक मुद्दे से भटक गई। उन्होंने कहा, 'आरक्षण का पक्ष लेने वालों को उन लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए जो इसके खिलाफ हैं। इसी तरह से इसका विरोध करने वालों को इसका समर्थन करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए।'