Ambikapur(Chhattisgarh): जिस स्कूल में बच्चे नियमित उपस्थिति देने में कतराते थे, वहां एक शिक्षिका ने कलात्मक और सृजनात्मक नवाचार शुरू कर दिशा ही बदल दी है।

छत्तीसगढ़ राज्य के अंबिकापुर जिले के सीतापुर स्थित आदर्शनगर मिडिल स्कूल की शिक्षिका ने अपने दम पर शिक्षा की नई राह बच्चों को दिखाई है । बच्चों के लिए अब यह शिक्षिका रोल मॉडल बन चुकी है। शिक्षिका ने बच्चों को रोल-प्ले से कलात्मक शिक्षा देनी शुरू की और आधुनिक शिक्षा के लिए एक माह के वेतन से लैपटॉप भी खरीदा। शिक्षिका के इस नवाचार से बच्चों में रचनात्मकता के साथ नियमित स्कूल आने की ललक जगाई है। जिले के सीतापुर के आदर्शनगर मिडिल स्कूल में कहानी, कविता व नई-नई विधाओं से शिक्षा देने की शुरुआत करने वाली शिक्षिका स्नेहलता टोप्पो क्षेत्र ही नहीं जिले की उन शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो स्कूल सिर्फ नौकरी के उद्देश्य से जाते हैं

शिक्षिका स्नेहलता ने स्कूल में कलात्मक एवं सृजनात्मक गतिविधियों से पढ़ाई शुरू कराई। इससे बच्चों में उत्साह आया और पहले जहां घर-घर सूचना भेजकर बच्चों को स्कूल बुलाया जाता था, वहीं अब बच्चे रोज उत्साह से स्कूल पहुंचने लगे हैं। शिक्षिका ने बच्चों को प्ले-रोल से अलग-अलग टॉपिक देकर पढ़ाई कराना शुरू किया तो उनमें और रुचि जागृत होने लगी।

रोज पढ़ाई के लिए नए-नए प्रयोग भी शिक्षिका द्वारा किए जाते हैं। नृत्य, गीत के साथ रचनात्मक गतिविधियों के लिए कविता, कहानी नियमित लिखने की आदत बच्चों में डाली गई। बालश्रम, नशापान, जनजागरुकता से जुड़ी लघु नाटिका भी स्कूल के खाली समय में कराने लगी।