कुदरत ने दोनों हाथ कमजोर कर दिए तो दांतों से कलम थामकर इबारत लिखना शुरू कर दिया। मध्यप्रदेश के चपरा गांव के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर अब इंटर कॉलेज तक जा पहुंचा है। यह कहानी है 17 साल की मंजेश बघेल की। मंजेश जब 3 साल की थी, तब पोलिया से उसके दोनों हाथ कमजोर हो गए, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और उसने अपनी पढ़ाई के लिए दांतों से कलम थाम ली, और दांतों के उपयोग से उसने अक्षर ज्ञान सीखा