बाजा बजाने का काम भैया राजा ही करते आए हैं। क्या आपने कभी कोई बारात कोई शोभा यात्रा ऐसी देखी है, जिसमें महिला बैंड पार्टी एक्शन में हो? आइये मिलते हैं नारी गुंजन सरगम महिला बैंड पार्टी से। पटना से सटे दानापुर के ढिबरा-मुबारकपुर गांव की महिलाओं ने नारी सशक्तीकरण का नया अध्याय लिखा है। महादलित समुदाय की इन 10 महिलाओं ने बैंड-बाजे के क्षेत्र में पुरुषों के एकाधिकार को ध्वस्त कर दिया। 2014 में जब इन्होंने इस काम को अंजाम देने की ठानी, तो लोगों ने जमकर मजाक उड़ाया। कहा, लो अब ये भी बैंड बजाएंगी...। मजाक ही नहीं विरोध भी सहा। लेकिन अंत में बैंड बजा डाला। बैंड पार्टी से जुड़ीं सावित्री, पंचम, लालती, मानषी, चित्ररेखा, अनीता, सोना, विज्ञानवती, डोमनी और छठिया देवी कहती हैं कि जब बाजा बजाना सीख रहे थे, तो मर्द लोग मजाक उड़ाने लगे, कहते कि ये लो अब यही काम बाकी रह गया है..., ये बैंड-वैंड इधर नहीं चलेगा। बुजुर्ग महिलाओं ने भी ताने मारने में कसर नहीं छोड़ी लेकिन इन महिलाओं ने नारी सशक्तीकरण का नया अध्याय लिखा है।