पालिथीन के बढ़ते प्रयोग ने प्लास्टिक का पहाड़ बनाना शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि शहर के नाले में पालिथीन की मात्रा ही अधिक हुआ करती है। जो कहीं से भी पर्यावरण के लिये शुभ संकेत नहीं है। प्लास्टिक की थैलियां भले ही मार्केटिंग करने के दौरान सहज प्रतीत होती हो, लेकिन सरेआम सड़कों पर इसे फेंक देने से निस्तारण की समस्या उभरकर सामने आ रही हैं। पर्यावरण में लगातार बढ़ती जा रही प्लास्टिक थैलियां कई अवरोध पैदा कर रहे हैं। पालिथीन मनुष्य सहित सभी जीवों, भूमि व जल के लिये घातक है। सस्ते पालिथीन का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिये और भी हानिकारक है। इसमें कई प्रकार के केमिकल मिले होते हैं। पाली बैग के खाने से जानवरों की मौत हो जाती है। पृथ्वी तल पर जमा पालिथीन जमीन के जल सोखने की क्षमता खत्म करता है। वहीं धरती की उर्वरक क्षमता को भी धीरे-धीरे खत्म कर देता है लेकिन पुणे के रहने वाले इस दंपति का मानना है कि प्लास्टिक एक अच्छा प्रोडक्ट है बशर्ते उसका इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए...