अक्षय कुमार की फिल्म पैड मैन इन दिनों चर्चा में है। ऐसे में केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान के वैज्ञानिक भी खासे उत्साही हैं। सीमैप के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि उनके संस्थान में विकसित लो कॉस्ट ईको फ्रेंडली सेनेटेरी नेपकिन की टेक्नोलॉजी को भी अच्छी किक मिल सकती है। अरुणाचलम मुरुगनंतम की रियल स्टोरी पर आधारित पैड मैन मूवी से समाज में वीमेन हाईजीन को जहां एक नई सोच मिलेगी, वहीं जागरूकता बढऩे से इसका बाजार बढऩे की भी उम्मीद है। ऐसे में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एसोमेटिक प्लांटस की विकसित की गई टेक्नोलॉजी को भी नए दावेदार मिलने की संभावना जोर पकड़ रही है। सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि देश में 20 फीसद महिलाएं ही मासिक धर्म के समय सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल करती हैं, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं अन्य विकल्पों का प्रयोग करती हैं, जिसके चलते सर्विक्स कैंसर व अन्य इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। इसकी वजह जानकारी का अभाव तो है ही, वहीं बाजार में बिकने वाले महंगे नेपकिन खरीदने की सामथ्र्य का न होना भी प्रमुख समस्या है। सीमैप के 'नारी' नाम से तैयार नेपकिन मेडिकेटेड होने के साथ-साथ बायोडिग्रेडेबिल हैं। मेडिकेटेड होने के कारण बैक्टीरियल व फंगल इंफेक्शन होने का खतरा नहीं रहता है। साथ ही नेपकिन की प्राकृतिक सुगंध-दुर्गंध को भी दूर करती है।