उत्तराखंड की एसिड अटैक पीड़िता कविता बिष्ट अपनी आंखों की रोशनी खो देने के बावजूद कई विकलांगों की मदद कर रही हैं. इसके लिए वह गेस्टहाउस का भी प्रबंध करती हैं. अपनी आंखों की रोशनी खो चुकी कविता खाना बनाती है, मोबाईल पर वीडियो भी देखती हैं और साथ ही हॉरमोनियम भी बजाती है. कविता कहती हैं, मैं विभिन्न रूप से विकलांग हुए लोगों की मदद करने की कोशिश करती हूं. मैं अपना काम करती हूं और इसके लिए मैं गेस्टहाउस का भी प्रबंध करती हूं.' उन्होंने कहा, 'मैं उत्तराखंड महिला सशक्तिकरण की ब्रांड एंबेसडर हूं और महिलाओं को अपना काम कभी नहीं छोड़ना चाहिए' कविता बिष्ट जब 19 साल की थी, तब उन पर एसिड से हमला किया गया इस हमले में कविता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं और उनकी आंखों की रोशनी चली गई इस हमले के बाद भी कविता ने अपने हौसले को बुलंद रखा और संघर्ष किया.