मनोरंजन के लिए जरिए बहुत सारे हैं। स्मार्ट फोन, टीवी, कंप्यूटर व इंटरनेट वगैरह-वगैरह, मगर रेडियो की जगह किसी ने नहीं ली। तकनीक के इस तूफान में रेडियो का दीया जलता रहा। मोबाइल फोन में रेडियो सुनने की सुविधा आ जाने इसे फिर से नया जीवन मिला। रेडियो से दूर हो रही आज की पीढ़ी एफएम रेडियो के जरिए फिर से जुडऩे लगी है। शहर में बढ़ती एफएम रेडियो चैनल्स की संख्या, तसदीक कर रही है कि नये कलेवर में 'रेडियो' फिर से छा जाने को तैयार है। महज कुछ साल पहले तक राजधानी में रेडियो चैनल के नाम पर सिर्फ आकाशवाणी का नाम लिया जाता था। आकाशवाणी के सतरंगी सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के दिलों पर राज कर रहे थे। आकाशवाणी रेस में अकेला था लेकिन टीवी के लोकप्रिय हो जाने से आकाशवाणी गूंज थोड़ी नरम पडऩे लगी। इस बीच मोबाइल उत्पादक कंपनियों में फोन पर ही एक स्विच पर एफएम रेडियो सुनना आसान बनाया। फिर क्या था, रेडियो की गूंज चाय की दुकान से लेकर बेड रूम व छात्रों के स्टडी रूम तक सुनाई पडऩे लगी। वैसे क्या आपको रेडियो का शौक है? अगर है तो आइए देखते हैं कोयंबटूर का एंटीक रेडियो म्यूज़ियम...