उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के गांव बसतड़ी के रहने वाले इस शख़्स का नाम पुष्कर दत्त भट्ट है। पुष्कर को साल 1999 में पत्नी और पुत्र की संदिग्ध हालात में जलने से हुई मौत के मामले में सज़ा हुई थी। तब उसकी उम्र 34 थी। 18 साल की सजा काटने के बाद पुष्कर जब 15 अगस्त 2017 को रिहा होकर घर लौटा तो पूरा गांव उसे उजड़ा हुआ मिला। डेढ़ साल पहले आपदा में पिथौरागढ़ का बस्तड़ी गांव पूरी तबाह हो गया था। यहां बादल फटने की घटना से 21 लोग जिंदा दफन हो गए थे, 24 रिहायशी भवनों का वजूद समाप्त हो गया था। इसी में पुष्कर दत्त का आशियाना भी शामिल था। उसने मुआवजे के लिए प्रशासन के दर पर दस्तक दी। अधिकारियों के चक्कर काटे, मिन्नतें की, लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हो पाई। आखिरी में तंग आकर अब पुष्कर ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर गुहार लगाई है कि या तो उसे मुआवजा दिला दो, नहीं तो फिर से जेल भेज दो।