ये है सात सौ साल पुराना बरगद का पेड़ जिसका अस्तित्व आज ख़तरे में है। इस पेड़ को बचाने के लिए सलाइन ड्रिप चढ़ाई जा रही है। तेलंगाना के महबूबनगर ज़िले से तीन किलोमीटर दूर स्थित इस पेड़ को राज्य सरकार ने ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार किया है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से इस स्थान की दूरी तकरीबन 90 किलोमीटर है। प्रकृति ने हमेशा अपनी अद्भुत रचनाओं के साथ मनुष्य को आश्चर्यचकित करने की कोशिश की है पिल्लालमर्री नाम से मशहूर ये बरगद का पेड़ प्रकृति की उत्कृष्ट कला का उदाहरण है। ये विशाल बरगद का पेड़ तकरीबन तीन एकड़ में फैला हुआ है। भारत में तीन बड़े बरगद के पेड़ हैं पिल्लालमर्री उन तीन पेड़ों में से एक है। लेकिन पिछले कुछ समय से बरसों पुराने इस पेड़ पर दीमक का प्रकोप बढ़ जाने से इसके कुछ हिस्से खोखले हो गए। शुरू में इसे बचाने के लिए इसके तने में केमिकल डाला गया, लेकिन यह तरीका नाकामयाब रहा। बाद में वन विभाग ने तय किया कि जैसे अस्पताल में मरीजों को सलाइन में दवा मिलाकर बूंद-बूंद चढ़ाई जाती है, वैसे ही पेड़ में बूंद-बूंद कर के सलाइन की बोतल से केमिकल चढ़ाया जाए। पेड़ के तने को बचाने के लिए उसे पाइप्स और पिल्लर्स से सपोर्ट दिया गया है। अब पेड़ की हालत काफी स्थिर है और उम्मीद है कुछ ही दिनों में इसे सामान्य कर लिया जाएगा।