गुजरात का मांडवी भारत के एक अहम बंदरगाह में से एक था, जो इस स्थान की समृद्धि का कारण भी था। कहा जाता है कि समुद्री मार्ग के जरिए व्यापार करने के लिए मांडवी बंदरगाह काफी प्रसिद्ध था। यहां सैकड़ों की संख्या में व्यापारी व उनके जहाज आया जाया करते थे। व्यापार से होने वाले मुनाफे को देख यहां रहने वाले हिन्दुओं व मुसलमानों के खारवां समुदाय ने जहाज को बनाने और सुधारने का काम शुरू किया। ये नांवें पूरी तरह लकड़ी के बनी होती थीं, जिनकी मजबूती ऐसी थी कि वह समुद्र की बड़ी लहरों को भी आसानी से पार कर जाते थे। इन विशाल नांवों को डोस कहा जाता है। मांडवी में आज भी इनका निर्माण कार्य किया जाता है जो इस जगह को खास पहचान देती है। लकड़ी के एक जहाज को बनाने में इतना समय लगता है कि देश की सत्ता तक में बदलाव आ जाता है। दरअसल, आज भी यहां जहाज हाथों से ही बनाए जाते हैं ऐसे में एक जहाज को बनाने में करीब 5 साल का वक्त लग जाता है।