दरियागंज... किताबों का दरिया ही है. हर किताब मिल जाती है यहां... हर विषय और स्ट्रीम की किताबें. पिछले 5 दशकों से दरियागंज की जिन पटरियों पर किताबें सजती थीं, वो अब खाली हैं. ट्रैफिक जाम नहीं है, लेकिन दरियागंज बुक मार्केट की पुरानी आभा गायब है. दरियागंज में जिनकी पास दुकानें थीं. वो अपने धंधे में लगे हैं, लेकिन जो पटरी पर दुकानें लगा रहे थे. उनमें से कुछ हाट में बैठे हैं. कुछ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. दरअसल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली यानि एमसीडी को ट्रैफिक को लेकर रेहड़ी-पटरी वालों से शिकायत थी... नेताजी सुभाष चंद्र मार्ग पर कपड़ों की दुकान लगाने वाले फुटकर विक्रेताओं का मामला कोर्ट में था... फैसला एमसीडी के हक में आया... और कोर्ट ने कहा कि रेहड़ी-पटरी वालों को रोड से हटना होगा.