कलीमुल्लाह खान स्कूल छोड़कर आम की बागवानी से जुड़े हैं। आम उनकी जिन्दगी हैं। आम की 315 वैरायटी विकसित करने वाले कलीम उल्लाह ने सातवीं में फेल होने के बाद आम के बागों की ओर रुख किया था। उन्होंने आम को खास बनाया और आम ने उन्हें। ऐसी शोहरत और कामयाबी मिली कि उनके नाम के आगे पद्मश्री जुड़ गया। कलीम उल्लाह अपनी नर्सरी अब्दुल्ला नर्सरी के बारे में कहते हैं कि यहां आना अपने 300 बच्चों के पास आने जैसा है। इनसे दूर होता हूं तो फिक्र लगी रहती है। एक बार मद्रास गया था। 15 दिन बाद लौटा तो घर बाद में गया पहले नर्सरी। पेड़ों को देखा, उन्हीं की छांव में बैठ गया।  मैंगोमैन के नाम से दुनिया में मशहूर पद्मश्री कलीम उल्ला खां अब तक नामचीन हस्तियों के नाम पर आधा दर्जन से अधिक आम पैदा कर चुके हैं।