30 नवंबर, 1967  पाकिस्तान की सियासत में यह दिन खास है, इस तारीख को लाहौर में डॉ. मुबाशिर हसन के घर मुल्क और अवाम के भविष्य को गढ़ने के लिए अहम फैसला लिया जाना था। उस वक्त पाकिस्तान में तानाशाह अयूब खान की सत्ता थी, जिसमें जुल्फिकार अली भुट्टो विदेश मंत्री थे। 1965 की जंग में भारत से करारी हार ने तानाशाह अयूब खान और भुट्टो के रिश्तों में दरार डाल दी थी। भुट्टो का कहना था कि अयूब खान ने ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर कर के वार्ता की मेज पर ही जंग हार गए। 30 नवंबर 1967 को लाहौर अधिवेशन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का गठन हुआ, जिसकी कमान जुल्फिकार अली भुट्टो के हाथों में दी गई। पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल को देखते हुए 1969 में अयूब खान ने राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया और सारी शक्तियां आर्मी जनरल याह्या खान को दे दी।