चंद्रयान 2 मिशन भारत के अंतरिक्ष प्रोगाम का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इस मिशन के लिए हमारे वैज्ञानिक करीब 10 सालों से तैयारी कर रहे थे। वैसे आप जरूर सोच रहे होंगें आखिर इस मिशन की जरूरत क्‍यों पड़ी, दरअसल इस अभियान से चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के अब तक के अछूते भाग के बारे में जानकारी मिलेगी। 

इसरो के आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, इस मिशन से  भौगौलिक, मौसम सम्बन्धी अध्ययन और चंद्रयान 1 द्वारा खोजे गए खनिजों का विश्लेषण करके चंद्रमा के अस्तित्त्व में आने की जानकारी भी हमें मिल सकेगी। वहीं  इस दौरान चंद्रमा पर रहने के दौरान, इसकी सतह के बारे में भी परीक्षण कर सकेंगें। इनमें चाँद पर पानी होने की पुष्टि और वहां पाई जानी वाली अनूठी रासायनिक संरचना वाली चट्टानों का विश्लेषण भी शामिल हैं।
 
चंद्रयान 2 मिशन भारत के लिए बेहद अहम है। 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव  विक्रम लैंडर के उतरते ही भारत इतिहास रच देगा। वैसे चंद्रयान 2 और चंद्रयान 1 में क्‍या अंतर है, यह आप जानते हैं। दरअसल, चंद्रयान-2 असल में चंद्रयान-1 मिशन की ही अगली कड़ी है। चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं।  चन्‍द्रयान-1 चन्‍द्रमा पर पानी होने की पक्‍की पुष्टि की। यह खोज सबसे अलग थी। चन्‍द्रयान-1 ने चन्‍द्रमा के उत्‍तरी ध्रुव क्षेत्र में बर्फ के रूप में पानी जमा होने की भी खोज की थी।  इसने चन्‍द्रमा की सतह पर मैग्निशियम, एल्‍युमिनियम और सिलिकॉन होने का भी पता लगाया। चन्‍द्रमा का मैप भी चंद्रयान 1 ने तैयार किया था, जो इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी। वहीं चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर अपना ''विक्रम'' मॉड्यूल उतारने की कोशिश करेगा और छह पहियों वाले रोवर ''प्रज्ञान'' को चांद पर फिट कर देगा और इसके जरिए कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। जबकि चंद्रयान-1 यह कार्य नही कर पाया था। चंद्रयान-1 का लिफ्ट ऑफ भार 1380 किलोग्राम था जबकि चंद्रयान-2 का भार 3850 किलोग्राम है।