भगवान गणेश की आराधना में मनाया जाने वाला ये त्यौहार पहले घरों में मनाया जाता था, लोग सामुदायिक तौर पर मनाते थे. पंडालों में भगवान गणेश की तस्वीरें सजाई जाती थीं. इस त्यौहार की शुरुआत हुई 16वीं शताब्दी में, जब छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की स्थापना की. भगवान गणेश पेशवाओं के कुल देवता माने जाते थे और उनके कैलेंडर में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का बड़ा महत्व होता था. लेकिन, तब ये त्यौहार मुख्य तौर पर घरों में ही मनाया जाता था... 1892 में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महानायकों में से एक बाल गंगाधर तिलक ने इस त्यौहार की पुर्नखोज की और राष्ट्रवादी नेताओं के लिए इस त्यौहार को रैली ग्राउंड बना दिया. मुंबई और पुणे की सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और 10 दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार में श्रद्धालुओं को एक नई आजादी का एहसास हुआ...