प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) मिशन को हरी झंडी 18 सितम्‍बर, 2008 को दी थी। 22 जुलाई 2019, जब भारत ने चंद्रयान 2 को लॉन्‍च किया। वैसे चंद्रयान 2 क्‍यों चंद्रयान 1 (Chandrayaan 1) से जुड़ा है। चंद्रयान 1 भारत का पहला चांद पर जाने वाला मिशन था। चंद्रयान 1 के बारे में 1999 में पहली बार सोचा गया इंडियन अकादमी ऑफ साइंस की बैठक में। इसी बैठक में  पहली बार चांद पर जाने के विचार को रखा गया। इसके बाद एस्‍ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने 2000 में इस पर विचार मंथन किया। इन दो बैठकों के बाद इस बात पर एक रजामंदी बन चुकी थी एक नेशनल लूनर मिशन टास्‍क फोर्स इसरो बनाएगी। इसरो को नवम्‍बर 2003 में भारत सरकार की तरफ से इस बात की मंजूरी मिली, कि भारत चांद पर जाएगा। चंद्रयान 1  को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र से  चंद्रमा पर  भेजा गया। यह पोलर सेटेलाइट लॉन्‍च व्‍हीकल (PSLV-C 2 ) से भेजा गया था। 14 नवम्‍बर 2008 को चंद्रयान 1  चंद्रमा पर उतरा। इसके साथ ही भारत चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया। उससे पहले चांद पर केवल अमेरिका, सोवियन यूनियन और जापान ही पहुंचे थे। वैसे चंद्रयान 2 चंद्रयान 1 की आगे की कड़ी है। इसमें चंद्रयान 2  14 दिनों तक चंद्रमा पर कई वैज्ञानिक परीक्षण करेगा । वहीं एक साल तक ऑर्बिटल एक्‍सपेरिमेंट होगा। चूंकि चंद्रमा पृथ्‍वी का नज़दीकी उपग्रह है, इसके माध्‍यम से अंतरिक्ष में खोज के प्रयास किए जा सकते हैं। चांद पर अब तक जीवन होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन चंद्रयान 1 ने जो खोज की हैं। उससे आगे की खोज चंद्रयान 2 करेगा। चंद्रयान 1 कैसे चंद्रयान 2 से जुड़ा हुआ है, इसी बारे में कृष्‍ण कुमार का आकलन।