एक तरफ बारुदी जमीन पर धमाके हो रहे थे, दूसरी तरफ उन धमाकों का जवाब बैलेट बटन की ताकत से दिया जा रहा था। लोकसभा चुनाव के पहले चरण में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में हुए चुनाव में नकस्लियों के बिछाए गए बारुद से मतदाताओं का हौसला लड़ रहा था। अब दूसरे चरण के चुनाव में जीन तीन सीटों पर मतदान होने हैं .. वहां पर भी शांति से मतदान करानी की चुनौती है क्योंकि ये तीनों सीटें भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र ही माने जाते हैं। लेकिन ये जिम्मा जिनके कंधों पर होता है.. उनके लिए ये कितना जोखिम भरा है ... एक नजर मतदान दल के जज्बे पर भी डालिए जिन्होंने बम के धमाकों और गोलियों की बौछारों से निकल कर पूरी कुशलता के साथ मतदान कराया और जिन्हें वापसी के दौरान भी नक्सलियों के खतरे से होकर गुजरना पड़ा। बावजूद इसके मतदान दलों ने पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभाई ।