यूपी के संसदीय क्षेत्र श्रावस्ती पर लगा पिछड़ेपन का कलंक नहीं दूर पा रहा है। बौद्ध तपोस्थली के साथ कई प्राचीनतम मंदिर व झीलें होने के बावजूद पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल सका। बालिकाओं के लिए इंटर कॉलेज तक नहीं है। रोजगार के साधन न होने से युवाओं को महानगरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। हवाई पट्टी का संचालन न होने से लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं परेशानियों को लेकर दैनिक जागरण की ओर से चुनावी चौपाल लगाई गई।

 चौपाल में प्रबुद्ध वर्ग में सियासी दलों के प्रति असंतोष नजर आया है। वक्ताओं ने किसी दल के एजेंडे में अब तक विकास के मुद्दे न होने पर आश्चर्य जताया है। जिला बनने के 22 साल बाद भी श्रावस्ती के माथे पर लगे पिछड़ेपन का कलंक दूर नहीं हो सका। बालिकाओं के लिए डिग्री, इंटर कॉलेज नहीं है। तकनीकी शिक्षा से छात्र-छात्राएं वंचित है।

औद्योगिक इकाईयां न होने से लोगों को महानगरों की तरफ रुख करना पड़ रहा है। हवाई पट्टी का संचालन न होने से लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। युवा रोजगार के लिए महानगरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। इको टूरिज्म का दर्जा भी नहीं मिल सका है। जिससे क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है।

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