गंगा भारत की जीवनधारा, पवित्रता और सदाचार की प्रतीक है और  इस धरती पर सबसे अधिक पूंजी जानी वाली नदी भी है। लेकिन विडंबना देखिए, गंगा दुनिया में छठी सबसे प्रदूषित नदी भी है। नवंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस के अस्सी घाट से नमामि गंगे कार्यक्रम को लांच किया था। दावा किया गया कि मार्च 2019 तक इस पवित्र नदी को 80 प्रतिशत तक प्रदूषण से मुक्त कर स्वच्छ बना दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके लिए 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी थी। लेकिन, आज पांच साल बाद जब नरेंद्र मोदी दोबारा जनता की अदालत में खड़े हैं, गंगा कितनी साफ हुई?