अमेठी के चुनावी इतिहास को देखा जाये तो अमेठी में ऐसा तीसरी बार हुआ कि कांग्रेस को हार मिली है। 1977 में पहली बार अमेठी के रास्ते सियासत में उतरे गांधी-नेहरू परिवार के छोटे बेटे संजय गांधी को शिकस्त की मार झेलनी पड़ी। उन्हें जनता पार्टी के रवींद्र प्रताप सिंह ने हराया। इसके 21 साल बाद 1998 में कांग्रेस को अमेठी में हार का सामना करना तब पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा को भाजपा के टिकट पर डॉ. संजय सिंह ने मात दी थी। 23 मई को  एक बार फिर 21 साल बाद ही सही अमेठी में गांधी-नेहरू परिवार के साथ ही कांग्रेस की हार पर इतिहास दोहराया गया और राहुल गांधी हार गये।  कृष्‍ण कुमार का विश्‍लेषण।