उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के टांडा क्षेत्र में दैनिक जागरण की ओर से बुनकरों की समस्याओं को लेकर चुनावी चौपाल लगाई गयी । जिसमें सरकारी सुविधाओं के बुनकरों तक न पहुंचने, GST की मार, व्यवसाय में मंदी की बजह से बढ़ने वाली बेरोजगारी और बुनकरों के लिए अच्छी शिक्षा और टांडा में माल की खरीद फरोख्त के लिए एक डिपो बनाने की बात जोर शोर से उठाई गई। 

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर संसदीय क्षेत्र में 60-70 हजार पॉवरलूम संचालित हैं, लेकिन टांडा को बुनकर नगरी माना गया है। जहां रहने वाले मेहनतकश बुनकर कड़ी मेहनत से साधारण पॉवरलूमों पर बेहतर एवं टिकाऊ कपड़ा तैयार करते हैं। इसी का नतीजा है कि कई उतार-चढ़ाव से गुजरने के बावजूद भी बुनकर बाहुल्य क्षेत्र टांडा विश्व पटल पर टांडा टेरीकाट के कपड़ों के उत्पादन में अपनी पहचान बना चुका है।
 
बुनकर व्यवसाय को संजीवनी मिलने की उम्मीद संजोए बुनकर सरकारों की वादाखिलाफी से काफी आहत दिखते हैं। बुनकरों ने बुनकर व्यवसाय के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के पीछे वर्षों से विभिन्न सरकारों की चली आ रही नीति को जिम्मेदार ठहराया।