दिल्ली की लेडी बाउंसर मेहरुन्निशा की कहानी मुलायम कंधों पर मजबूत हाथों और मजबूत इरादों की कहानी है. मेहरून्निशा करीब एक दशक से बाउंसर हैं और पिछले कुछेक सालों से हौज खास के एक पब में 10 घंटे की नाइट शिफ्ट करती हैं. इनके ऊपर पब में महिलाओं पर ज्यादती न होने देने, लड़ाइयां रोकने, महिला कस्टमर्स को सुरक्षित बाहर निकालने और अवैध ड्रग को पकड़ने की जिम्मेदारी है, लखनऊ की उषा ने तो बर्दाश्त की हद टूटने के बाद हिम्मत की ऐसी मिसाल कायम की कि दूसरों के लिए मार्गदर्शक बन गईं. 2006 में उनके एक साथी ने उनके साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी. इस घटना के बाद ऊषा एक साल ट्रॉमा में रहीं लेकिन अब वही ऊषा हजारों लड़कियों की ताकत हैं. वह देश भर में करीब 65 हजार लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे चुकी हैं. रामनगर नौबस्तापुर मोहल्ले में रहने वाली ऊषा कहती हैं कि सड़क चलते लड़कों के कमेंट, हाथ पकड़ लेने जैसी घटनाएं उनके साथ खूब होती थीं. तब हमने तय किया कि हमें अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही कुछ करना होगा. कोई हमारी मदद करने के लिए आगे नहीं आएगा. हमारे ग्रुप ने फिर एक ड्रेस बनवाई रेड और ब्लैक. जब हम वो पहन कर निकलते तो कॉमेंट पास होता कि देखो लाल परियां जा रही हैं. फिर एक दिन एक कॉमेंट आया रेड ब्रिगेड. यह कॉमेंट हमें इतना अच्छा लगा कि हमने अपने ग्रुप का नाम रेड ब्रिगेड ही रख लिया. इसी तरह चंदौली जिले के डंगरा शाहपुर की युवतियां पुरुष गोताखोरों को मात दे रही हैं. गोताखोरी की इनकी क्षमता देख जिला प्रशासन किसी मुसीबत में पहले इन्हीं को बुलाता है.

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