हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के दौरान आमतौर पर लोग सजग नहीं रहते हैं। कुछ लोग एजेंट के कहने भर से बिना रिसर्च किए कोई भी इंश्योरेंस पॉलिसी ले लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। सही पॉलिसी का चुनाव ही जरूरत के समय लाभदायक साबित होता है। किसी भी पॉलिसी को उसकी कीमत के आधार पर खरीदना सबसे बड़ी गलती होती है। हम अपनी इस वीडियो स्टोरी में आपको बता रहे हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के दौरान आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

पॉलिसी में क्या चीजें नहीं हैं शामिल-हेल्थकेयर पॉलिसी को बड़ी जांच-परख के बाद ही खरीदना चाहिए क्योंकि कुछ पॉलिसियों में कुछ चुनिंदा बीमारियां को शामिल नहीं किया जाता है। अधिकांश पॉलिसी में वो बीमारियां या क्षति शामिल नहीं होती जो युद्ध, रेसिंग या आत्महत्या की कोशिश जैसी गतिविधियों के कारण हुई होती है। 

तय राशि ही होती है रीइम्बर्स-कई इंश्योरेंस पॉलिसी में सब लिमिट्स होती है जो कि सर्जरी, कमरे का रेंट और आइसीयू स्टे से जुड़ी होती है। जैसे कुछ पॉलिसी में स्पष्ट में होता है कि एक तय सीमा से ज्यादा का रूम रेंट रीइम्बर्स नहीं होगा। यह सभी सब लिमिट्स को जानने के लिए पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स अच्छी तरह से पढ़े जाने चाहिए। 

रेस्टोरेशन बेनिफिट-हर एक हेल्थ प्लान में एक सम एश्योर्ड लिमिट होती है जो कि पॉलिसीधारक के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। इस सम एश्योर्ड की एक साल में क्लेम करने की सीमा होती है। यदि सम एश्योर्ड से ज्यादा का खर्चा आता है तो पॉलिसीधारक को खुद देना पड़ता है। लेकिन अगर आपने हेल्थ प्लान रेटोरेशन बेनिफिट के साथ लिया हुआ है तो इंश्योरर सम एश्योर्ड को रीस्टोर करके रख देगा ताकि अगर उसी साल में फिर से पॉलिसीधारक बीमार होता है तो सम एश्योर्ड मिल जाए। 

अस्पतालों का नेटवर्क-हेल्थ पॉलिसी डॉक्यूमेंट में अस्पतालों के पास उनके कोऑडिनेटर्स की एक लिस्ट होती है। पॉलिसीधारक को इस लिस्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए। साथ ही यह देखना चाहिए कि आपके घर के आसपास कौन कौन से अस्पताल हैं।