नील नितिन मुकेश की फ़िल्मी यात्रा बड़ी दिलचस्प रही है। वो हिंदी सिनेमा के एक ऐसे परिवार से आते हैं, जहां की सुबह और शामें संगीत की महफ़िलों के नाम रहती हैं, मगर नील ने कैमरे से दिल लगाया। लीजेंडरी सिंगर मुकेश के पोते और नितिन के बेटे नील ने ‘विजय’ और ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करने के बाद 2007 की फ़िल्म ‘जॉनी गद्दार’ से लीड एक्टर के रूप में पारी शुरू की थी। इस फ़िल्म में नील का किरदार ग्रे शेड्स लिये हुए था, जिसे काफ़ी पसंद किया गया और नील में बेहतर भविष्य की सम्भावनाएं देखी गयीं। 10 साल से अधिक के करियर में नील ने ऐसी फ़िल्मों का चुनाव किया, जिनमें उन्हें अपनी अदाकारी का हुनर दिखाने का मौक़ा मिले। कबीर ख़ान की ‘न्यूयॉर्क’, मधुर भंडारकर की ‘जेल’, प्रदीप सरकार की ‘लफंगे परिंदे’ जैसी फ़िल्मों के ज़रिए नील के बेहतरीन एक्टर होने की मिसाल हैं। ‘न्यूयॉर्क’ में उन्होंने कटरीना कैफ़ और ‘लफंगे परिंदे’ में उन्होंने दीपिका पादुकोण के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर किया था। 2012 में आयी अब्बास मस्तान की ‘प्लेयर्स’ के ज़रिए नील ने अपनी एक्टिंग का एक अलग ही रंग दिखाया। इस फ़िल्म में नील पूरी तरह नेगेटिव रोल में थे। प्लेयर्स हिट हॉलीवुड थ्रिलर ‘द इटैलियन जॉब’ का आधिकारिक रीमेक थी। 2015 में नील सूरज बड़जात्या की फ़िल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ में सलमान ख़ान के सौतेले भाई के किरदार में नज़र आये। 2017 में अजय देवगन की ‘गोलमाल अगेन’ में भी नील ने नेगेटिव किरदार ही निभाया था। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कम, मगर असरदार थी। नील अब बाहुबली एक्टर प्रभास के साथ ‘साहो’ में दिखेंगे। इस बीच नील एक बिटिया के पापा भी बने हैं। नील की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ़ को लेकर आपके ज़हन में कई सवाल कौंधते होंगे। मसलन, एक संगीत परिवार से आने के बावजूद नील एक्टर क्यों बने या बेटी नूरवी के आने से उनकी ज़िंदगी में क्या बदलाव आये हैं। ऐसे सभी सवालों के जवाब नील ने लाइट्स कैमरा एक्शन के इस एपिसोड में दिये हैं, जिसमें उनके साथ बातचीत की हैjagran.com के एंटरटेनमेंट एडिटर पराग छापेकर ने।