बॉलीवुड में कई कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें आप सालों से पर्दे पर देख रहे होते हैं। उनकी अदाकारी से प्रभावित भी होते हैं, मगर उनके नाम और ज़िंदगी से वाकिफ़ नहीं होते। फिर अचानक एक फ़िल्म आती है और यह कलाकार इतना पसंद किया जाने लगता है कि स्टार बन जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ है ‘बधाई हो’ के गजराज राव के साथ, जिन्हें दर्शकों ने ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘आमिर’ और ‘तलवार’ जैसी फ़िल्मों में महत्वपूर्ण किरदार निभाते हुए देखा होगा। 

‘बधाई हो’ गजराज राव के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई है। पैरेंटल प्रेग्नेंसी जैसे दिलचस्प विषय पर बनी इस फ़िल्म में उन्होंने जीतेंदर कौशिक का रोल निभाया, जो आयुष्मान खुराना के किरदार नकुल कौशिक का पिता होता है। मिस्टर कौशिक को निभाने में गजराज राव ने जिन बारीकियों का ध्यान रखा है, उसके पीछे थिएटर का उनका लम्बा अनुभव तो है ही, साथ ही असल ज़िंदगी के किरदारों का भी योगदान है। 

फ़िल्म में मिस्टर कौशिक को रेल विभाग में टीटीई दिखाया गया है। टीटीई बनने के लिए उन्होंने जो हाव-भाव या बोलचाल का इस्तेमाल किया है, वो सब अपने आस-पास के लोगों से सीखा। ‘बधाई हो’ की अभूतपूर्व सफलता के बाद बतौर कलाकार भी गजराज राव की ज़िंदगी में काफ़ी बदलाव आया है, जिनके बारे में उन्होंने जागरण डॉट कॉम के एंटरटेनमेंट एडिटर पराग छापेकर से विस्तार से बातचीत की है। इस बातचीत को आप ‘लाइट्स कैमरा एक्शन’ के इस एपिसोड में देख-सुन सकते हैं।