पंकज त्रिपाठी बॉलीवुड के उन एक्टर्स में शामिल हैं, जो ग्लैमर की दुनिया में कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। पंकज हिंदी सिनेमा में काफ़ी अर्से से सक्रिय हैं, मगर पिछले तीन-चार सालों में वो केंद्र में आये हैं और अब उस मुक़ाम पर पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें सोचकर डायरेक्टर्स किरदार लिखते हैं। पंकज की लोकप्रियता में उनकी अदाकारी की अलग तरह की शैली का बड़ा योगदान है, जो अपने आप में अद्भुत है। यह शैली उन्होंने कैसे डेवलप की, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। डायलॉग डिलीवरी का उनका ठेठ देसी अंदाज़ गहरे तक असर करता है। फिर चाहे ‘फुकरे रिटर्न्स’ के पंडित जी हों या ‘स्त्री’ का रूद्र हो या फिर ‘मिर्ज़ापुर’ के कालीन भैया, पंकज ने हर किरदार को अपनी अदाकारी से बड़ा किया है। पंकज अब ‘लुका छिपी’ में नज़र आएंगे और उनका वही कॉमिक अंदाज़ दिखेगा। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से पढ़ाई करने के बाद पंकज 2004 में मुंबई आये थे। फ़िल्म ‘रन’ में उन्होंने एक किरदार निभाया, मगर इसका उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था। इसके बाद वो लगातार फ़िल्मों में काम करते रहे, मगर 2012 में अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ ने पंकज को लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने सुलतान कुरैशी का रोल निभाया था। जागरण डॉट कॉम के एंटरटेनमेंट एडिटर पराग छापेकर ने पंकज से निजी और प्रोफेशनल ज़िंदगी पर विस्तार से बातचीत की है।