एलर्जी और प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। सांस की बीमारी अस्थमा, घातक भी साबित होती है। प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा के बढ़ने का भी खतरा है। मोटापे से भी अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है।  सांस संबंधी इस रोग के चलते मोटापे का भी खतरा हो सकता है। इस बीमारी से पीड़ित अधिकतर लोग ताउम्र इनहेलर जैसी दवाओं को लेते रहते हैं और चाहकर भी उसे छोड़ नहीं पाते।सांस की बीमारी, मौत के बड़े कारणों में से एक है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 2.50 फीसद लोग अस्थमा की बीमारी से पीड़ित हैं। इससे पीड़ित ज्यादातर लोग एलोपैथिक इलाज कराते हैं। आपात स्थिति में ये दवाएं मरीजों की जान बचाने में तो कारगर साबित होती हैं, लेकिन मरीजों को हमेशा दवाएं लेनी पड़ती है। इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि किस तरह आप अस्थमा का आयुर्वेदिक उपचार कर सकते हैं । देखें वीडियो