पेट्रोल और डीजल की कीमतें डी-रेग्युलेट होने के बाद इनके बीच का अंतर लगातार कम होता जा रहा है। देश के चार बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महज 10 रुपये प्रति लीटर का फर्क है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि फिर डीजल गाड़ियां खरीदना कितना फायदे का सौदा रह गया है? क्योंकि डीजल गाड़ियां एक तो महंगी होती हैं और लंबे समय में इनकी सर्विस का खर्चा भी पेट्रोल गाड़ियों से ज्यादा होता है। अपनी इस खबर में हम आपको एक्सपर्ट की मदद से यह बता रहे हैं कि आप कार खरीदते समय यह कैसे चुने कि पेट्रोल कार लेना आपके लिए फायदे का सौदा है या डीजल। पेट्रोल इंजन वाली कार आपको 4 लाख रुपए में मिल सकती है, वहीं उसी मॉडल की डीजल कार के लिए आपको करीब 80 हजार से 1 लाख रुपए तक ज्यादा खर्च करने होते हैं। साथ ही अगर आप अपनी कार पेट्रोल में खरीदते हैं और उसमें सीएनजी किट लगवाना चाहते हैं तो उसके लिए बाजार में आपको 18 हजार से 28 हजार रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। कंपनी से सीएनजी किट लगी कार के लिए आपको करीब 50-55 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं। यानी कीमत के आधार पर डीजल कार के मुकाबले पेट्रोल और सीएनजी किट वाली कारें ज्यादा किफायती होती है।