संवाद सहयोगी, उत्तरकाशी : शराब के अवैध कारोबार के प्रति जिला प्रशासन कितना सजग है इसकी बानगी आपको उत्तरकाशी जिले में देखने को मिलेगा। जिला मुख्यालय के इर्द-गिर्द सज रही अवैध शराब की दुकानें इसकी तस्दीक कर रहे हैं। लेकिन जिला प्रशासन मामला संज्ञान में होने के बावजूद भी इस ओर मूकदर्शक बना हुआ है। यही नहीं प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान भी हो रहा है।

जनपद उत्तरकाशी में आबकारी विभाग की ओर से किसी भी दुकानदार को क्षेत्र में बार खोलने का लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद भी जिले के विभिन्न ब्लॉक भटवाड़ी, डुंडा, चिन्यालीसौड़, नौगांव, पुरोला और मोरी क्षेत्र में रात ढलते ही आसपास दुकानों में शराबियों का जमावड़ा लग जाता है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि रात होते ही बहू बेटियों का बाजार में चलना मुश्किल हो जाता है। रात के समय आप किसी भी दुकान से सामान नहीं खरीद सकते। परिवार के साथ आप किसी भी होटल में रात्रि का भोजन नहीं कर सकते। जगह-जगह होटल, ढाबा, गल्लियां, नुक्कड़ आदि स्थानों में शराबियों की महफिल सजी रहती है। इनसे क्षेत्र का वातावरण भी दिन प्रतिदिन दूषित हो रहा है। गली-गली सज रहे मयखाने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग चेकिग के नाम पर इस ओर खानापूर्ति करते हैं और आपसी तालमेल बैठाकर वहां से चलते बनते हैं। काशीनगरी में शराब के अवैध मयखाने खूब फल फूल रहे हैं। कहा यदि आबकारी विभाग की ओर से क्षेत्र में बार खोलने का लाइसेंस दिया जाता तो शायद इन पर नकेल लग जाती और प्रदेश सरकार को भी राजस्व का नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

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जिला आबकारी अधिकारी हरीश चंद्र ने बताया कि आबकारी विभाग की ओर से जिले में किसी भी दुकानदार को बार लाइसेंस नहीं दिया गया है। विभाग के पास केवल दो सर्किल बड़कोट और डुंडा में दो इंस्पेक्टर हैं। दो सर्किल उत्तरकाशी और पुरोला में इंस्पेक्टर के पद रिक्त चल रहे हैं। जिसके चलते होटल, ढाबों में चेकिग नहीं हो पाती है। चेकिग के लिए पुलिस प्रशासन से बातचीत की जाएगी। जल्द ही इस पर नकेल कसी जाएगी।

Posted By: Jagran

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