शैलेंद्र गोदियाल, उत्तरकाशी : Uttarakhand Tourism उत्तराखंड के चारधामों में गंगोत्री प्रमुख धाम है। मान्यता है कि गंगा की धारा शिव की जटा यहीं पर धरती पर उतरी थी। इन दिनों यात्री बड़ी संख्या में गंगोत्री के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन, गंगोत्री धाम के निकट तथा गंगोत्री धाम को जोड़ने वाले गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट दर्जनों धार्मिक और एतिहासिक पर्यटक स्थल हैं। जहां पर्यटक आसानी से जा सकते हैं, प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।

ये हैं प्रमुख पर्यटक और धार्मिक स्थल

हर्षिल : गंगोत्री धाम से 25 किलोमीटर पहले हर्षिल विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए होटल, होम स्टे, गढ़वाल मंडल विकास निगम का गेस्ट हाउस मौजूद है। हर्षिल में लक्ष्मीनारायण को प्राचीन मंदिर है। यहां भागीरथी और जलंद्री नदी के संगम पर हरि की एक शिला। जिसके कारण हर्षिल को प्राचीन में हरिशिला कहते थे। यहां देवदार के जंगल और सेब के बागीचे पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।

गंगा का मायका मुखवा

उत्तरकाशी : गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर्षिल से चार किलोमीटर की दूरी पर मुखवा गांव है। मुखवा गांव सड़क से जुड़ा है। गंगोत्री के कपाट बंद होने के बाद गंगा की डोली छह माह के लिए मुखवा गांव के गंगा मंदिर में विराजमान होती है। गंगोत्री के कपाट खुलने की तिथि के एक दिन पहले इस गांव में गंगा उत्सव होता है। जिसके बाद गंगा की डोली यात्रा गंगोत्री के लिए रवाना होती है। यह गंगा डोली यात्रा धार्मिक, एतिहासिक और सामरिक अनुभव का अहसास कराती है।

नेलांग घाटी

उत्तरकाशी : गंगोत्री से 12 किलोमीटर पहले भैरव घाटी है। भैरोघाटी से नेलांग घाटी के लिए सड़क जाती है। भैरव घाटी से 27 किलोमीटर दूर नेलांग स्थान पड़ता है। यहां आइटीबीपी का कैंप व सेना का कैंप है। पार्क क्षेत्र और सामरिक ²ष्टि से संवेदनशील होने के कारण यहां गंगोत्री नेशनल पार्क व प्रशासन की अनुमति लेकर जाना होता है। ट्रांस हिमालय का क्षेत्र होने के कारण यहां के रेतीले पहाड़ों तथा नदी-झील की सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। आप यहां प्रशासन की अनुमति लेकर आसानी से जा सकते हैं।

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गर्तांगली

उत्तरकाशी : गंगोत्री धाम से 13 किलोमीटर पहले भैरव घाटी का पुल पड़ा है। यह पुल जाड़ गंगा पर स्थिति हैं। उत्तराखंड में किसी नदी यह सबसे ऊंचा पुल है।

इस पुल के पास से डेढ़ किलोमीटर का ट्रैक है। जो गर्तांगली को जोड़ता है। जो दुनिया के खतरनाक मार्गों में सुमार है। गर्तांगली चट्टानों को काटकर बनाया था। भारत-चीन युद्ध से पहले व्यापारी इस रास्ते से ऊन, चमड़े से बने वस्त्र व नमक लेकर बाड़ाहाट (उत्तरकाशी का पुराना नाम) पहुंचते थे। यहां गंगोत्री नेशनल पार्क कि अनुमति से आसानी से जाया जा सकता है। अनुमति लेने के लिए भैरव घाटी पुल के पास गंगोत्री नेशनल पार्क का काउंटर स्थापित है।

कल्प केदार और सात ताल

उत्तरकाशी : जांगला से लेकर झाला तक के 12 किलोमीटर के क्षेत्र को हर्षिल घाटी के नाम से जाना जाता है। 1803 से पहले इस घाटी में 240 मंदिरों का समूह था। लेकिन, 1803 में भूंकप व भूस्खलन आने के कारण यहां भारी तबाही हुई थी जिसके चलते यहां एक विशाल झील बनी थी और अधिकांश मंदिर दब गए थे। कुछ वर्ष पहले जब धराली में खुदाई हुई तो वहां एक शिव मंदिर निकला। जिससे कल्पकेदार के नाम से जाना जाता है। वहीं सात ताल धराली गांव होते हुए पांच किलोमीटर की दूरी पर हैं। यहां सात तालों का समूह है। यहां ताल के साथ भीम गुफा और सफेद बुरांश की फुलबाड़ी का भी दीदार होता है। यहां बेहद ही रोमांच करारी ट्रैक है। सुमेरू फिल्म की 80 फीसद शूटिंग सात ताल क्षेत्र में हुई है।

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Edited By: Sumit Kumar