उत्तरकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर: सीएम धामी ने की घोषणा, धार्मिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद उत्तरकाशी में विश्वनाथ-शक्तिमाता मंदिर कॉरिडोर की परिकल्पना पर चर्चा तेज हो गई है।


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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अजय कुमार, उत्तरकाशी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से विश्वनाथ-शक्तिमाता मंदिर कॉरिडोर निर्माण की घोषणा के बाद अब उत्तरकाशी के वास्तुविद केसी कुड़ियाल की उस परिकल्पना की चर्चा भी शुरू हो गई है, जिसे उन्होंने कुछ माह पहले ही डिजाइन के माध्यम से प्रस्तुत किया था।
वास्तुविद कुड़ियाल का अनुमान है कि कॉरिडोर के बनने से शहर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी हो सकती है।
दरअसल, यहां मुख्यमंत्री की घोषणा से पहले ही वास्तुविद कुड़ियाल ने विश्वनाथ मंदिर के महंत अजय पुरी की पहल पर कॉरिडोर को लेकर अपनी परिकल्पना तैयार कर संबंधित डिजाइन सामने रखा था।
1.2 किमी के दायरे में कॉरिडोर होगा विकसित
वास्तुविद केसी कुड़ियाल के प्रस्तावित डिजाइन में 1.2 किमी के दायरे में कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसमें पहाड़ी वास्तुकला शैली में तीन प्रवेश द्वार के साथ ही रूट प्रस्तावित किया गया है, साथ ही कॉरिडोर क्षेत्र में आने वाले मंदिरों को भी पारंपरिक पहाड़ी शैली में विकसित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि धार्मिक आस्था के साथ उत्तरकाशी की पारंपरिक स्थापत्य कला और स्थानीय पहचान भी कॉरिडोर में दिखाई दे।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के वास्तुविदों के पैनल में भी शामिल कुड़ियाल के अनुसार कॉरिडोर की परिकल्पना तैयार करते समय धार्मिक महत्व के साथ क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को भी ध्यान में रखा गया है। उनका मानना है कि यदि प्रस्तावित कॉरिडोर की परिकल्पना धरातल पर उतरती है और विश्वनाथ-शक्तिमाता मंदिर क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है तो इससे उत्तरकाशी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
कॉरिडोर में प्रस्तावित किए तीन प्रवेश द्वार
वास्तुविद कुड़ियाल के द्वारा प्रस्तुत डिजाइन में कोरिडोर का पहला मुख्य प्रवेश द्वार कंडार देवता मंदिर के निकट भटवाड़ी रोड से प्रसतावित किया गया है, इसके बाद दूसरा प्रवेश द्वार भटवाड़ी रोड से विश्वनाथ चौक के निकट तथा तीसरा प्रवेश द्वार कोर्ट रोड पर मुख्य बाजार उपभोक्ता भंडार के निकट प्रस्तावित है।
काठ-कुनी वास्तुकला को भी मिलेगा संरक्षण
वास्तुविद कुड़ियाल के अनुसार इस कॉरिडोर के बनने से पहाड़ी वास्तुकला काठ-कुनी का भी संरक्षण व संवर्धन होगा। वास्तुकला में काठ का मतलब लकड़ी और कुनी का मतलब कोना होता है, इस निर्माण तकनीक में लकड़ी और पत्थर को बारी-बारी से एक विशेष तरीके से लगाया जाता है, जिससे दीवारें मजबूत और लचीली बनती हैं। इस कॉरिडोर में मंदिरों के विकास व सुंदरीकरण में इस वास्तुकला का प्रयोग इसे नये आयाम देगा।
यह प्रस्तावित है कॉरिडोर का रूट
वास्तुविद कुडि़याल की ओर से प्रस्तुत डिजाइन में भटवाड़ी रोड से कॉरिडोर में प्रवेश कर श्रद्धालु कंडार देवता मंदिर, परशुराम मंदिर, दत्तात्रेय मंदिर, अन्नपूर्णामंदिर, भैरव मंदिर, गोपेश्वर महादेव मंदिर, शक्ति मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, कृष्ण मंदिर, कोटेश्वर मंदिर और केदार मंदिर के दर्शन कर सकेंगे।
