उत्तरकाशी: विकास की नई उड़ान, हिमालय की गोद में आस्था और प्रगति का संगम
उत्तरकाशी, जो कभी दुर्गम क्षेत्र था, अब सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं और पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देकर विकास की नई कहानी ...और पढ़ें
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HighLights
95% से अधिक गांव सड़कों से जुड़े, सिल्कयारा सुरंग कार्य जारी।
स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध।
पारंपरिक फसलों को बढ़ावा, लाल चावल को राष्ट्रीय पहचान मिली।
डिजिटल डेस्क, उत्तरकाशी। हिमालय की गोद में बसा उत्तरकाशी, जो कभी दुर्गम रास्तों और सीमित सुविधाओं के लिए जाना जाता था, आज विकास की एक नई कहानी लिख रहा है। गंगा और यमुना की उद्गम स्थली, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों से सुशोभित यह जिला, अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रगति का प्रतीक बन गया है।
सड़कों और सुरंगों से जुड़ता पहाड़
कभी संकरे रास्तों और घंटों के इंतजार वाले इस जिले में अब चौड़ी सड़कें गांवों की दहलीज तक पहुंच गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष, रमेश चौहान के अनुसार, 95% से अधिक गांव अब सड़कों से जुड़ चुके हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री घाटियों को जोड़ने वाली सिल्कयारा सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जो विकास को और गति देगा। सीमांत गांवों तक सड़कें न केवल सुरक्षा, बल्कि विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर रही हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार
देहरादून तक के लंबे सफर पर निर्भर रहने वाला उत्तरकाशी अब स्वास्थ्य सुविधाओं में आत्मनिर्भर बन रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. श्याम विजय सिंह के अनुसार, चारधाम यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है, और जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं। क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण जिले में ही गंभीर मरीजों का इलाज संभव बनाएगा।
पारंपरिक फसलों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
विकास की असली तस्वीर खेतों में भी दिख रही है। नौगांव ब्लॉक के कोटियाल गांव की स्वतंत्रत बंधानी जैसी महिलाओं के प्रयासों से मंडुवा, झंगोरा और लाल चावल जैसी पारंपरिक फसलें खेतों में लौट आई हैं। सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत लाल चावल को उत्तरकाशी की पहचान मिली है, और यह राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त कर चुका है। मंडुवा और लाल चावल, जिनकी पहले कोई पूछ नहीं थी, आज समर्थन मूल्य और उचित दाम पर बिक रहे हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
उत्तरकाशी की नदियां अब केवल आस्था का स्रोत नहीं, बल्कि ऊर्जा का भी केंद्र हैं, जैसे कि टोंस नदी पर बनी नेटवाड़ मोरी जलविद्युत परियोजना। भारतनेट के तहत गांवों तक पहुंचता इंटरनेट और होमस्टे जैसी सुविधाएं स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर दे रही हैं। उत्तरकाशी की यह विकास यात्रा, पहाड़ों के जिद्दी हौसले और सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का एक जीता-जागता उदाहरण है, जहां हर मुश्किल के बाद पहाड़ फिर से खड़ा होता है और प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूता है।
