उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की मार, टूटे रास्तों के कारण बीमारों को अस्पताल पहुंचाना हो रहा मुश्किल
वर्षाकाल में उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सड़क सुविधा के अभाव और भूस्खलन के कारण बीमारों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है।

अल्मोड़ा में मार्ग बंद होने के कारण इस तरह डोली में मरीज को ले जाया गया
HighLights
वर्षाकाल में डंडी-कंडी से अस्पताल पहुंचाए जा रहे मरीज।
प्रसव पीड़िताओं सहित कई बीमारों की रास्ते में मौत।
80 संपर्क मार्ग बंद, 300 से अधिक गांवों का संपर्क कटा।
जागरण संवाददाता, देहरादून। वर्षाकाल पहाड़ी जिलों के लिए मुसीबत लेकर आया है। सड़क सुविधा का अभाव, भूस्खलन के चलते बंद पड़े संपर्क मार्ग और चिकित्सक एवं स्टाफ विहीन क्षेत्र के सरकारी अस्पताल इस संकट को और बढ़ा रहे हैं।
बीमार लोगों को डंडी-कंडी से अस्पताल पहुंचाने के लिए कई किमी की दूरी पैदल नापनी पड़ रही है। खासकर, प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल पहुंचाना तो चुनौती बन गया है।
कई बीमार व प्रसव पीड़िताएं रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। बीते एक माह में इन्हीं परिस्थितियों के चलते तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि डंडी-कंडी से पैदल अस्पताल पहुंचाने के मामले तो आए दिन सामने आ रहे हैं।
बंद मार्ग जिंदगी पर पड़ रहे भारी
शुक्रवार को उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक स्थित ओसला गांव से एक प्रसूता को जब ग्रामीण डंडी से पांच किमी दूर सांकरी ले जा रहे थे, तभी उसने दम तोड़ दिया। जबकि, नवजात की मौत जन्म लेते ही हो गई थी।
अल्मोड़ा के सल्ट ब्लाक स्थित सुदूर पणचूरा गांव में तबीयत बिगड़ने पर एक 32-वर्षीय महिला की जान चली गई। गांव सड़क से नहीं जुड़ा है, सो महिला को पहले डोली से तीन किमी की खड़ी चढ़ाई नापकर सड़क तक पहुंचाया गया और फिर रामनगर, गुरुग्राम व दिल्ली। वहां सफदरजंग अस्पताल में 11 जुलाई को उसकी मौत हो गई।
देहरादून के साहिया क्षेत्र में भी इन्हीं हालात के चलते एक बीमार महिला को जान गंवानी पड़ी। चार अगस्त को जब महिला को यूटिलिटी वाहन से अस्पताल ले जाया जा रहा था तो वाहन साहिया-क्वानू के बीच मलबे में फंस गया। ऐसे में महिला को कंधे पर लादकर सीएचसी साहिया लाया गया। हायर सेंटर रेफर करने पर शनिवार को उसने श्रीमहंत इंदरेश अस्पताल में दम तोड़ दिया।
डंडी-कंडी और डोली ही जीवन का सहारा
शनिवार को चंपावत में मोस्टा गांव से एक 80-वर्षीय व्यक्ति को डंडे पर बांधकर वर्षा के बीच आठ किमी दूर सीम गांव पहुंचाया गया। तब जाकर वृद्ध को टनकपुर उप जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया जा सका।
पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक में पिछले दिनों ऐसा ही मामला सामने आया। वहां बीमार पत्नी को सड़क तक पहुंचाने के लिए पति को उसे पीठ पर लादकर सात किमी की दूरी पैदल नापनी पड़ी।
चमोली जिले में एक माह के भीतर दशोली, देवाल, नंदानगर, थराली आदि गांवों से 12 प्रसव पीड़िताओं को छह से आठ किमी पैदल चलकर डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
80 संपर्क मार्ग बंद, 300 से अधिक गांवों का संपर्क कटा
अभी भी पर्वतीय जिलों में वर्षा व भूस्खलन के चलते 80 संपर्क मार्ग बंद हैं और 300 से अधिक गांवों का संपर्क कटा हुआ है। इनमें से अधिकांश दूरस्थ गांवों के आसपास न तो अस्पताल की सुविधा है न बजार आदि की ही। कई गांवों के बच्चों को तो विद्यालय पहुंचने में मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। बरसाती गदेरों के उफान पर रहने से हर वक्त जान का जोखिम बना रहता है।
