उत्तरकाशी, शैलेंद्र गोदियाल। कोरोना संक्रमण का इम्पैक्ट यह भी है कि बड़े स्तर पर पहाड़ में रिवर्स पलायन हो रहा है। लेकिन, प्रदेश के सरकारी सिस्टम के पास अभी तक ऐसा कोई प्लान नहीं है कि गांव लौट चुके और लौट रहे लोगों को स्वरोजगार से कैसे जोड़ा जाएगा। यही वजह है कि देश-विदेश से वापस गांव लौट रहे लोगों के सामने अपने बंजर खेतों को हरा-भरा करने के सिवा अन्य कोई विकल्प नहीं है। 

हैरानी इस बात की है कि खेती से जुड़े कृषि, उद्यान, आलू एवं शाकभाजी विभाग भी इसमें रुचि नहीं ले रहे। वहीं, सरकारी आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन के बाद गढ़वाल के पांच जिलों में 45 हजार से अधिक लोग वापस लौटे हैं। इनमें सात हजार तो उत्तरकाशी जिले के ही हैं। रिवर्स पलायन में पौड़ी का पहला नंबर है।

गढ़वाल मंडल के पांच जिलों उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, चमोली व रुद्रप्रयाग से शिक्षा व रोजगार के लिए पलायन करने वाले लोग लॉकडाउन के बाद लगातार वापस लौट रहे हैं। अब तक टिहरी जिले में दस हजार, रुद्रप्रयाग जिले में पांच हजार और चमोली जिले में छह हजार से अधिक लोग वापस लौट चुके हैं। 

आने वाले दिनों में इस संख्या के और बढ़ने का अनुमान है। लेकिन, रिवर्स पलायन कर गांव लौटने वाले इन प्रवासियों के सामने पहली चिंता अपने खंडहर हो रहे घरों को संवारने की है। फिर बंजर खेतों को आबाद करना भी आसान नहीं है। हालांकि, कुछ गांवों में इसके लिए कवायद शुरू हो चुकी है, लेकिन अब मुश्किल बीज की है। यह ठीक है कि कुछ संस्थाएं वापस लौटे लोगों की मदद कर रही हैं, लेकिन सभी जगह ऐसी संस्थाएं मौजूद नहीं हैं।

इधर, सरकारी सिस्टम का पूरा ध्यान अभी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए क्वारंटाइन व होम क्वारंटाइन करने तक ही सीमित है। रिवर्स पलायन कर लौट रहे प्रवासियों को रोजगार व स्वरोजगार देने के लिए शासन स्तर से अभी कोई खाका तैयार नहीं है। मनरेगा के तहत इन प्रवासियों को रोजगार देने में भी जॉब कार्ड की बाध्यता आड़े आ रही है।

किया जा रहा है सर्वेक्षण 

उत्तरकाशी के मुख्य विकास अधिकारी पीसी डंडरियाल के मुताबिक, प्रदेश सरकार की ओर से एक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। इसमें प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी के माध्यम से एक लिंक दिया गया है। जिसमें इन लोगों को बताना है कि वे क्या करना चाहते हैं। इसके बाद शासन स्तर से ही इस पर प्लानिंग होनी है। फिलहाल सभी ग्राम विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बाहर से आए लोगों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

पर्यटन रोजगार में अभी लंबा इंतजार

पहाड़ में रोजगार का सबसे बड़ा साधन पर्यटन व तीर्थाटन है। लेकिन, कोरोना ने इस साधन की बुरी तरह से कमर तोड़ डाली और अब इससे उबरने में लंबा समय लगना तय है। जो लोग पहले से इस व्यवसाय से जुड़े हैं, उनको भी रोजगार देने की चुनौती है। 

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ऐसे में हॉर्टिकल्चर या एग्रीकल्चर पर आधारित लघु-कुटीर उद्योग के अलावा कोई रास्ता नहीं है। जिससे ग्रामीण अर्थ व्यवस्था मजबूत हो सके। पलायन आयोग का तर्क है कि रिवर्स पलायन करने वाले प्रवासियों का आर्थिक पुनर्वास होना जरूरी है।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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