जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी : हिमालय, हिमालय की संस्कृति तथा हिमालयवासियों के सरोकारों को लेकर विभिन्न संगठनों की एक कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें हिमालय की संस्कृति को बचाने के लिए हिमालयी क्षेत्रों के लोगों के सरोकारों को जीवंत रखने की वकालत की गई।

श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सभागार में आयोजित कार्यशाला में हिमालय और आजीविका, वन अधिकार अधिनियम, हिमालयी गांवों एवं बुग्यालों में कूड़ा निस्तारण तथा अभी कुछ समय पहले हाईकोर्ट की ओर से बुग्यालों में रात्रि विश्राम न करने के आदेश पर चर्चा की गई। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने कहा कि हिमालय और हिमालयवासी एक-दूसरे के पूरक हैं। हिमालय से हमें जीवन मिला है तो यहां के वा¨शदे सदियों से हिमालय की रक्षा कर रहे हैं। हमारा कर्तव्य यह है कि प्रकृति से प्राप्त संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करें कि इनकी निरंतरता बनी रहे। रिलायंस फाउंडेशन के कमलेश गुरुरानी ने कहा कि एक महत्वपूर्ण पहलू यहां की संस्कृति है, जो कहीं न कहीं आज दूसरी संस्कृतियों के दबाव में दिखाई देती है। हमें समग्र रूप में आजीविका संरक्षण के साथ ही संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कार्य करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बुग्यालों के संबंध में हाईकोर्ट का जो आदेश आया है, उसमें वन विभाग को चिह्नित स्थानों की जानकारी देनी चाहिए, जहां बुग्यालों के निकटवर्ती क्षेत्र में पर्यटक अपने टैंट लगा सकें। गांव और बुग्यालों में कूड़ा निस्तारण के लिए गांवों को जिम्मेदारी के साथ धनराशि भी दी जानी चाहिए। तरुण पर्यावरण के नागेंद्र दत्त ने कहा कि हिमालय और हिमालय के लोगों के लिए हमें आवाज उठानी पड़ेगी और समय-समय पर ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से समुदाय में जागरूकता लानी पड़ेगी। इस मौके पर पूर्व जिपंस रणवीर राणा, भाजपा जिला महामंत्री हरीश डंगवाल, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के खजान, रेणुका समिति के संदीप उनियाल, एसबीएमए के अजय पंवार, ग्राम प्रधान कमद राम चन्द्र, नवीन शुक्ला, खुशपाल ¨सह, गंगा प्रसाद, ज्योति चमोली आदि मौजूद थे।

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