उत्तरकाशी, [शैलेंद्र गोदियाल]: पुष्पा चौहान पहले उत्तराखंड राज्य आंदोलन का हिस्सा रहीं, फिर शराब के खिलाफ मुहिम की अगुआ बनीं और अब पूरे मनोयोग से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हुई हैं। यह उनके 25 साल के संघर्ष का प्रतिफल ही है कि आज उत्तरकाशी के गणेशपुर में 40 महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सिलाई-बुनाई के साथ स्थानीय उत्पादों का कारोबार कर रही हैं।
जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से आठ किलोमीटर दूर गंगोत्री हाईवे से लगे गणेशपुर गांव में गैणा सिंह चौहान व लीला देवी के घर वर्ष 1973 में पुष्पा का जन्म हुआ। एक भाई व दो बहनों में वह दूसरे नंबर की हैं।
पीजी कॉलेज उत्तरकाशी से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री लेने के बाद पुष्पा वर्ष 1994 में उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ी और राज्य गठन तक उसमें सक्रिय भागीदारी करती रहीं।

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इसके बाद उन्होंने महिला पंचायत का गठन किया, जिसके माध्यम से वह महिला उत्पीड़न के मामलों को महिला हेल्प लाइन तक ले जाती थीं। इसी बीच वर्ष 2007 में गणेशपुर गांव में शराब का गोदाम खोलने की तैयारी हुई तो पुष्पा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इसकी जमकर खिलाफत की। इस मामले में पुष्पा को मुकदमा भी झेलना पड़ा। लेकिन, आखिर में जीत संघर्ष की हुई और प्रशासन को गणेशपुर से शराब का गोदाम हटाना पड़ा।


अब पुष्पा ने गांव की महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनका मनोबल बढ़ाने की ठानी। इसके लिए वर्ष 2010 में उन्होंने 'विनायक' स्वयं सहायता समूह का गठन किया। पहले चरण में 19 महिलाओं को समूह से जोड़ा गया। जो आज मसाले और घराट का आटा तैयार कर अपनी आर्थिकी संवार रही हैं।
गांव की 20 अन्य महिलाओं को स्कूल ड्रेस की सिलाई और गर्म कपड़ों की बुनाई के लिए तैयार किया गया। वर्तमान में ये महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिए आसपास के 20 आंगनबाड़ी केंद्रों में टीएचआर की सप्लाई कर रही हैं। टीएचआर की सप्लाई करने वाला यह उत्तरकाशी जिले का अकेला समूह हैं।

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हमेशा आगे बढ़कर मातृशक्ति का नेतृत्व करने वाली पुष्पा को गणेशपुर के ग्रामीणों ने निर्विरोध प्रधान भी चुना। पुष्पा कहती हैं कि वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत महिलाओं का मनोबल बढ़ाने की है। हम ऐसा कर सके तो उन्हें आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता। गणेशपुर की महिलाओं ने इसे साबित भी कर दिखाया है।
दो साल से हो रहा प्याज का उत्पादन
गणेशपुर में महिलाएं स्थानीय उत्पाद बेचने के अलावा प्याज का भी उत्पादन कर रही हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने प्याज का 700 कुंतल उत्पादन किया। जबकि, वर्ष 2016 में यह बढ़कर 800 कुंतल हो गया। इससे महिलाओं को अच्छा मुनाफा हुआ।
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Posted By: Bhanu

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