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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 20, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इन नौ गांवों को आज भी है सड़क का इंतजार, जानिए

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Sat, 20 Oct 2018 05:44 PM (IST)

उत्तरकाशी के नौं गांव ऐसे हैं जिन्हें आजतक सड़क का इंतजार है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को कर्इ तरह की दिक्कतेें झेलनी पड़ रही है।

इन नौ गांवों को आज भी है सड़क का इंतजार, जानिए
इन नौ गांवों को आज भी है सड़क का इंतजार, जानिए

उत्तरकाशी, [जेएनएन]: भटवाड़ी तहसील क्षेत्र के नाल्ड कठूड़ पट्टी के नौ गांव आज भी मीलों की पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी से पिलंग और जौड़ाव गांव जूझ रहे हैं। इन गांवों को सड़क से जोड़ने के केवल झूठे आश्वासन मिले हैं। 

जिला मुख्यालय 30 किलोमीटर दूर भटवाड़ी तहसील मुख्यालय पड़ता है। इसी तहसील क्षेत्र की नाल्ड कठूड़ पट्टी के र्हुी, भुक्की, सालंग, पिलंग, जौड़ाव, सिल्ला, स्याबा, सिरोर, कामर गांव ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर से लेकर 18 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इन गांवों में सबसे सुदूरवर्ती गांव पिलंग है। इस गांव को पहुंचने के लिए आज भी 18 किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। 

सड़क न होने से ये गांव अन्य सुविधाओं से भी वंचित हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य की व्यवस्था बदहाल है। इन गांवों को जोड़ने वाले पैदल रास्तों की स्थिति भी खराब है। वर्ष 2016 के सितंबर माह में पिलंग गांव को जोड़ने वाला पैदल रास्ता अवरूद्ध होने के कारण एक 13 साल के बीमार किशोर को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। इसके कारण उसकी मौत हुई। इस तरह की कई घटनाएं पहले भी इन गांवों में हो चुकी हैं। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान होती हैं।

विधायक गोपाल रावत ने बताया कि सिल्ला गांव की सड़क के लिए धन आवंटित हो गया है। पिलंग और जौड़ाव की सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण की कार्यवाही चल रही है। कामर और स्याबा गांव के लिए प्रस्तावित सड़क की निविदा प्रक्रिया चल रही है। दो सालों के अंतराल में इन सभी गांव तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य है। 

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