शैलेंद्र गोदियाल, उत्तरकाशी। कोरोना महामारी के बीच रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए चिकित्सक भी जोर देते हैं, लेकिन इस दौर में कुछ व्यक्ति ऐसे भी है जो चिकित्सक न होते हुए भी चिकित्सक की भूमिका में हैं। कोरोना संक्रमितों के साथ स्वास्थ्य कर्मियों, स्थानीय आमजन को भी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करने वाले गिलोय का काढ़ा और हर्बल टी निश्‍शुल्क उपलब्ध करा रहे हैं। इन्हीं कोरोना वॉरियर्स में शामिल हैं हिमालय पादप बैंक उत्तरकाशी के अध्यक्ष पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल। यही नहीं 20 से अधिक औषधीय पौधों को भी निश्‍शुल्क दे रहे हैं। गत मार्च से लेकर अभी तक प्रताप पोखरियाल चार सौ से अधिक औषधीय निशुल्क पौधों को भेंट कर चुके हैं।

उत्तरकाशी के जिला कोविड हेल्थ केयर सेंटर व जिला कोविड केयर सेंटर में भर्ती कोरोना संक्रमितों को हिमालय पादप बैंक के प्रताप पोखरियाल और उनकी टीम इसी अप्रैल माह में तीन सौ लीटर गिलोय का काढ़ा दे चुके हैं, जबकि गत वर्ष कोरोना काल में प्रताप पोखरियाल ने दो हजार लीटर काढ़ा और दो हजार पैकेट हर्बल टी के तैयार किए थे। जिनको उन्होंने निश्‍शुल्क रूप से कोरोना संक्रमितों और आमजनों को निश्‍शुल्क रूप से वितरित किया। लगातार बढ़ती मांग पर प्रताप पोखरियाल निरंतर काढ़ा तैयार करने में जुटे हुए हैं। प्रताप पोखरियाल ने कहा कि हर सप्ताह अस्पताल और कोविड केयर सेंटर में निश्‍शुल्क रूप से काढ़ा उपलब्ध कराया जाएगा।

इन जड़ी-बूटी से तैयार किया जा रहा है काढ़ा

पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल गिलोय, तेजपत्ता, दस प्रकार की तुलसी, स्टीविया, टमरू, अदरक, हल्दी, अश्वगंधा, हरण, बहेड़ा, रोजमेरी, कास्नी फूल, अजवेन, पुदीना, प्रीपरमेट, सतावरी, लेमन ग्रास, जवाग्रास, सर्पगंदा, नीम, एलोवेरा, ब्रह्मी सहित कई जड़ी बूटियों से काढ़ा तैयार कर रहे हैं। ये सभी जड़ी-बूटियां उत्तरकाशी में स्थित श्याम स्मृति वन में हैं। वरुणावत की तलहटी पर श्याम स्मृति वन को प्रताप पोखरियाल ने रोपित किया है तथा संरक्षित किया है। इसकी शुरुआत प्रताप पोखरियाल ने वर्ष 2004 में शुरू की। इस वन को तैयार करने प्रताप पोखरियाल रात दिन जुटे रहे। आज यह जंगल करीब 15 हेक्टेअर में फैलकर अपनी हरियाली तथा खुशबू बिखेर रहा है। प्रताप पोखरियाल कहते हैं कि मिश्रित वन ही हिमालय को बचाने में सार्थक हैं। वरुणावत की तलहटी पर उनके पिता के नाम से श्याम स्मृति वन में बांज के 1000 से अधिक पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। इसी तरह से हिंसर, किनगोड़, बिछू घास की झाड़ी से लेकर जड़ीबूटी के अलावा चारापत्ति और फलदार पेड़ हैं। उन्होंने गंगोत्री धाम में भी वन तैयार किया है, जबकि भैंत गांव में भी एक शहीद वन सहित चार वन विकसित किए हुए हैं।

इन जड़ी-बूटी से तैयार की है हर्बल टी

प्रताप पोखरियाल हर्बल टीम में दस प्रकार की तुलसी, तेजपत्ता, लेमनग्रास, जावाग्रास, कड़ी पत्ता, नीलकंठ, पारिजात, अदरक, सतावर, घिंगारू, टेमरू सहित आदि औषधीय पादप को शामिल करते हैं। उत्तरकाशी में इस टी की काफी मांग बढ़ी है।

दो सौ से अधिक पौधे हैं पादप बैंक में

हिमालय पादप बैंक के अध्यक्ष प्रताप पोखरियाल ने बताया कि कुछ शिक्षकों, चिकित्सकों व सामाजिक कार्यकर्त्ताओं के सहयोग से गत मार्च माह में हिमालय पादप बैंक का गठन किया गया। इस पादप बैंक में 200 से अधिक प्रजातियों के पौधों को रखा गया है। इन पौधों को सुशीला तिवाड़ी हर्बल गार्डन ढालवाला से मंगाया जाता है, जबकि कई औषधीय पौधों को हिमालय पादप बैंक के निकट श्याम स्मृति वन में तैयार किया जाता है। जो निश्‍शुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। इन पौधों में अश्वगंधा, राम तुलसी, श्याम तुलसी, कपूर तुलसी, बदरीनाथ तुलसी, गंगा तुलसी, यमुना तुलसी, लांग तुलसी, शूगरफ्री तुलसी, एलोबेरा, स्टीविया, पत्थरचूर, लेमनग्रास, जावाग्रास, निरगुंडी, देवदार, टेमरू, गिलोलय, बेलपत्र आदि शामिल हैं। प्रताप पोखरियाल कहते हैं कि जो पौधे ऋषिकेश ढालवाला से मंगवाए जाते हैं उन पौधों को नर्सरी के रेट पर ही बेचा जाता है।

हिमालय पादप बैंक से जुड़े शिक्षक डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल कहते हैं कि हिमालय पदप बैंक में स्थानीयजनों को अपने घरों में बच्चों व अन्य सदस्यों के जन्म दिवस पर गमले सहित पौधा भेंट करने के लिए भी उन्हें पौधे मिल सकेंगे। इसके अलावा जनपद भर के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए यह यह जैव विविधता की दृष्टि से आकर्षण का केंद्र होगा। साथ ही खाली पड़ी भूमि व विभिन्न राष्ट्रीय पर्वों व दिवसों पर पौधरोपण के लिए पदप बैंक पहल करेगा।

ये जुड़े हैं पादप बैंक से

पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल के साथ मंजीरा देवी आयुर्वेदिक कालेज के चेयरमैन डॉ. भगवन नौटियाल, उमेश प्रसाद बहुगुणा, डॉ. प्रेम पोखरियाल, रजनी चौहान, रमा डोभाल, कोमल असवाल, जमुना पोखरियाल, मंगल सिंह पंवार, माधव जोशी सहित 15 से अधिक शिक्षक व चिकित्सक हैं।

घर से मिली पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा

जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर डुंडा ब्लाक के भैंत गांव में 1958 को श्याम पोखरियाल के घर प्रताप पोखरियाल का जन्म हुआ। बेटे के जन्म पर श्याम पोखरियाल ने 11 पौधों का रोपण किया। प्रताप पोखरियाल को पर्यावरण से प्रेम की शिक्षा घर से मिली। आठवीं की पढ़ाई के बाद 18 वर्ष की उम्र में प्रताप घर से ऋषिकेष पहुंचे। जहां चार वर्षों तक मोटर मैकेनिक का कार्य सीखा तथा टाटा मोटर्स में भी मैकेनिक का कार्य किया। पिता की मौत होने पर वापस लौटे तो फिर 1980 से उत्तरकाशी में अपना नया ठिकाना बनाया। मोटर मैकेनिक के साथ बसों का भी संचालन किया। लेकिन, बचपन में पिता के साथ जंगल संरक्षण की मिली प्रेरणा जाग उठी। पहले भैंत गांव में वन पंचायत की भूमि पर दो वन तैयार किए। फिर एक वन भैंत गांव में अपने बंजर खेतों में तथा एक वन वन विभाग की भूमि पर तैयार किया।

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